हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हरम मुतह्हर हज़रत मासूमा स.ल. के खतीब ने मीडिया साक्षरता की आवश्यकता की ओर इशारा करते हुए कहा, पवित्र क़ुरआन फरमाता है कि अगर कोई फासिक तुम्हारे पास कोई खबर लेकर आए, तो उस पर यकीन मत करो बल्कि पहले उसकी जांच-पड़ताल करो।
आज विरोधियों के नेटवर्क तीन-तीन शिफ्टों में काम कर रहे हैं ताकि लोगों के दिमागों को भटका सकें। शहीद रहबर (रह) पर भी नाजायज़ तोहमतें लगाई गईं, लेकिन आपने देखा कि उन्होंने अपने मज़लूम दादा इमाम हुसैन (अ.ल. की तरह अपने परिवार घर और काम की जगह को बंद नहीं किया।
उन्होंने अपने भाषण में हज़रत इमाम जवाद (अ.स.) के व्यक्तित्व और स्थान की ओर इशारा करते हुए कहा,हज़रत जवादुल आइम्मा (अ) लगभग आठ साल की उम्र में इमामत के पद पर आसीन हुए। उनके बाद इमाम हादी (अ.स.) भी आठ साल की उम्र में और इमाम ज़माना (अज्फ) पाँच साल की उम्र में इमामत को पहुँचे।
यह दिखाता है कि परवरदिगारे आलम एक मासूम इमाम की सभी खूबियों को बचपन में ही एकत्रित कर सकता है और विलायत ए इलाही का पद चुनावी या वंशानुगत नहीं है, बल्कि उस योग्यता और क्षमता पर आधारित है जो खुदा ने इमाम को अता की है।
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